संस्‍कृतशब्‍दकोशः

संस्‍कृत-हिन्दी-आंग्ल शब्दकोश


संस्कृत — हिन्दी

विपुला — आर्याछन्दसः भेदः।; "विपुलायाः प्रथमे चरणे अष्टादश द्वितीये चरणे द्वादश तृतीये चतुर्दश तथा चतुर्थे त्रयोदश मात्राः सन्ति।" (noun)

इन्हें भी देखें : अन्त्यविपुला; आदिविपुला; उभयविपुला; जघनविपुला; भविपुला; महाविपुला; मुखविपुला; युग्मविपुला; पृथिवी, भूः, भूमिः, अचला, अनन्ता, रसा, विश्वम्भरा, स्थिरा, धरा, धरित्री, धरणी, क्षौणी, ज्या, काश्यपी, क्षितिः, सर्वसहा, वसुमती, वसुधा, उर्वी, वसुन्धरा, गोत्रा, कुः, पृथ्वी, क्ष्मा, अवनिः, मेदिनी, मही, धरणी, क्षोणिः, क्षौणिः, क्षमा, अवनी, महिः, रत्नगर्भा, सागराम्बरा, अब्धिमेखला, भूतधात्री, रत्नावती, देहिनी, पारा, विपुला, मध्यमलोकवर्त्मा, धारणी, गन्धवती, महाकान्ता, खण्डनी, गिरिकर्णिका, धारयित्री, धात्री, अचलकीला, गौः, अब्धिद्वीपा, इडा, इडिका, इला, इलिका, इरा, आदिमा, ईला, वरा, आद्या, जगती, पृथुः, भुवनमाता, निश्चला, श्यामा; कुमारी, कण्टकप्रावृता, कन्यागृहकन्या, तरणि, ब्रह्मघ्नी, विपुलाश्रवा, स्थूलदला, कपिलः; पर्याप्तम्, यथेष्टम्, यथेष्टः, यथेष्टा, प्रचुरः, प्रचुरा, प्रचुरम्, विपुलः, विपुलम्, विपुला;