संस्‍कृतशब्‍दकोशः

संस्‍कृत हिन्‍दी आंग्‍ल शब्‍दकोशः


अद्‍यतनीयः शब्‍दः


शब्‍दः : प्रध्वंसाभाव
हिन्दी : नैयायिक-वैशेषिकों के अभाव पदार्थ की एक विधा
आंग्‍लम् : one of the four varieties of non-existence maintained by the naiyayika-vaisheshikas; non-existence due to destruction of the thing, as of ghata

शब्‍दभेदः : पुं.
वर्गः :
विवरणम् : अभाव की ४ विधाएं हैं : प्रागभाव - घड़े की उत्पत्ति से पूर्व जब केवल मिट्टी होती है या घट के दो कपाल होते हैं‚ तब घट का अभाव; यह अभाव अनादि है‚ किन्तु सान्त है । प्रध्वंसाभाव - जब घट नष्ट हो जाता है और उसके टुकेड़े ही रह जाते हैं; यह अभाव सादि किंतु अनन्त है । अत्यन्ताभाव - जैसे भूमि पर घट का न होना; यह अनादि एवं अनन्त है । अन्योन्याभाव - वह है जो कि स्वरूपतः पृथक् दो वस्तुओं के पारस्परिक भेद का ही दूसरा नाम माना जा सकता है ।
दृश्यम् : 853

नमस्‍कारः ! भवतां स्‍वागतं शब्‍दकोशेऽस्‍मिन् ।


पूर्वप्रकाशिताः ५ अद्यतनीयशब्‍दाः


प्रवक कूदने वाला one who springs
प्रलोल उद्भ्रान्त (सागर)... greatly agitated,...
प्रलोभन प्रलोभक attracting, alluring
प्रलोभन लुभाना‚ बरगलाना‚ ... allurement, seduc...
प्रलोठित घूर्णित whirled (मदेन)

चर्चायामधः


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