संस्‍कृतशब्‍दकोशः

संस्‍कृत-हिन्दी-आंग्ल शब्दकोश


संस्कृत — हिन्दी

ग्रथ् — सूचिमुखे सूत्रप्रवेशानुकूलः व्यापारः।; "सा सीवनार्थे सूचिकायां सूत्रं ग्रथते।" (verb)

Monier–Williams

ग्रथ् — {grath} or {granth}1 cl. 9. P. {grathnāti} (fut. p. {granthiṣyat} xxv, 8##perf. 3. pl. {jagranthur} or {grethur} 1-2, 6##ind. p. {granthitvā} or {grath}, 23 ), to fasten, tie or string together, arrange, connect in a regular series vi f. xxv, 8##to string words together, compose (a literary work) vi, 5: cl. 1. P. Ā. {grathati}, {te} (vḷ.)##P. {granthati}, xxxiv, 31##Ā. {granthate} (aor. {agranthiṣṭa}), to be strung together or composed (a literary work), Bhāradv. on 3-1, 89: Caus. P. Ā. {granthayati}, {te}, to string together iv, 262##[cf. ? ; Lat. {glut-en} ?]

ग्रथ् — {grath} or {granth}, cl. 1. Ā. {grathate} or {granth}, to be crooked (lit. and fig.) ii, 35

इन्हें भी देखें : उद्ग्रथ्य; ग्रथ्न; ग्रथ्य; प्रग्रथ्; विग्रथ्; रचय, विरचय, उपनिबन्ध्, ग्रथ्, ग्रन्थ्, कव्, कृ; सङ्ग्रन्थ्, संग्रन्थ्; संश्लिष्, संग्रथ्, सङ्ग्रथ्; उद्ग्रथ्, शिथिलीकृ, शिथिलय, प्रमुच्, उन्मुच्, निर्भिद्, मोक्षय, विभिद्, विदा, अनुश्रथ्, उच्छ्रथ्, उच्छ्वस्, निश्चृत्, प्रचृत्, विचृत्, विश्रथ्, विश्रम्भय, विस्रंसय, श्रथ्, श्रन्थ्; उद्ग्रन्थ्; गुच्छः, स्तबकः, गुच्छकः, ग्रथ्नः, गुलुच्छः, पुलकः, गुञ्जः, कूर्चकः, स्तम्बकः, गुत्सकः, पुली, पूलः; संयुज्, घट्, युज्, ग्रथ्, संनियुज्, सम्बन्ध्, अनुबन्ध्, सन्धा, उपसन्धा, संश्लेषय्, संलग्नीकृ;